Saturday, April 27, 2013
Sunday, October 7, 2012
मैंने उसे बालू फांकते देखा है ...
कांधे पर मैला झोला लटकाए
अपने होंठों से कुछ बुदबुदाता हुआ
कभी इस सड़क...
कभी उस चौराहे
अक्सर मुझे वो दिखता है
कभी हँसता, कभी रोता
कभी देर तक मुस्कुराता हुआ
सड़क पर मलंग की भांति वो चलता जाता है
बडबडाता हुआ शायद वो
उपरवाले से कुछ कहता रहता है
सड़क के सहयात्रियों से न टोक-टाक
न ही झगडा
बस अपने में ही रहता है
भूख लगने पर
कूड़े की ढेर में फेंकी
जूठन से पेट भरता है
अक्सर मैंने उसके हांथों में
पापड़ बनी रोटियों को भी देखा है
लेकिन, एक दिन मैंने उसे
बालू के ढेर पर बैठे देख
अपने आप को झंझोरा है
क्योंकि...
मैंने उसे उस दिन
बालू फांकते देखा है...
Wednesday, September 29, 2010
Saturday, April 24, 2010
तपती धरती... तपता मन
तप रहा है सूरज
तप रही है धरती
धरती के तपने से
तप रहे हैं लोग
अब तो समाज के तपने से
तपने लगा है मेरा मन !
तप रही है धरती
धरती के तपने से
तप रहे हैं लोग
अब तो समाज के तपने से
तपने लगा है मेरा मन !
Friday, April 9, 2010
गोदना
गोदना से होता था
औरतों का श्रृंगार
औरतें गुदवाती थी
इसे अपने बाजू , पैर
और कभी-कभी पूरे शरीर पर
पुरुषों का भी प्रिय
रहा है गोदना
पहले काले रंग का होता था ये
समय के साथ
इसने बदला है अपना रंग और रूप
रंग के साथ इसने नाम भी है बदला
टैटू का नाम तो अपने सुना ही होगा
औरतों का श्रृंगार
औरतें गुदवाती थी
इसे अपने बाजू , पैर
और कभी-कभी पूरे शरीर पर
पुरुषों का भी प्रिय
रहा है गोदना
पहले काले रंग का होता था ये
समय के साथ
इसने बदला है अपना रंग और रूप
रंग के साथ इसने नाम भी है बदला
टैटू का नाम तो अपने सुना ही होगा
Saturday, April 3, 2010
पानी
पहले हम लिखते थे
पानी की कलकल
और...
उसमे कलरव करते
पंछियों के बारे में
अब हम लिखते है
बोतल में बंद पानी के रहस्य
और ...
सुनामी रूपी सैलाब के बारे में
क्या पानी सिर्फ
हाहाकार मचाता रहेगा
या फिर...
पानी के लिए हाहाकार मचता रहेगा !
पानी की कलकल
और...
उसमे कलरव करते
पंछियों के बारे में
अब हम लिखते है
बोतल में बंद पानी के रहस्य
और ...
सुनामी रूपी सैलाब के बारे में
क्या पानी सिर्फ
हाहाकार मचाता रहेगा
या फिर...
पानी के लिए हाहाकार मचता रहेगा !
Subscribe to:
Posts (Atom)